Friday, November 22, 2019

Level of Management in Hindi for MBA degree Students

Level of management in Hindi for Digital Business


level of Management:

 जब हम किसी organization या company की कार्य प्रणाली की बात करते हैं तो कोई भी organization कई  स्तर पर कार्य करता है । और हर स्तर पर management की अपनी एक व्यवस्था होती है । और ये हर चरण की  व्यवस्था ही level management कहलाती है ।

प्रत्येक level पर सभी individual managers को विभिन्न भूमिकाये निभानी होती है और विभिन्न tasks pure करने होते हैं ।

आमतौर पर, management के तीन स्तर हैं, अर्थात-
  • Administrative or Top Level of Management.
  • Executive or Middle Level of Management.
  • Supervisory or Lower Level of Management.

Administrative or Top Level of Management:

टॉप लेवल के management में Board of directors (BOD) और chief Executive Officer (CEO) शामिल  होते हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी को महाप्रबंधक (GM) या प्रबंध निदेशक (MD) या अध्यक्ष भी कहा जाता है। Board of Directors शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के प्रतिनिधि हैं, यानी इनको कंपनी के Shareholders द्वारा चुना जाता है। इसी प्रकार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी का चयन किसी organization के Board of Directors के द्वारा किया जाता है। टॉप लेवल मैनेजमेंट को organisation का मस्तिष्क भी कहा जाता है। क्योंकि इनका कार्य योजना बनाना फिर उस योजना को कार्यान्वित करना होता है। 

टॉप लेवल मैनेजमेंट की मुख्य भूमिका निम्नानुसार संक्षेपित है: -

  • यह संगठन के उद्देश्यों, policies और plan को निर्धारित करता है।
  • टॉप level management  ज्यादातर सोच, योजना और निर्णय लेने का काम करता है। इसलिए, इन्हें administrators कहा जाता है ।
  • ये उपलब्ध संसाधनों को जुटाते हैं (इकट्ठा करते हैं और एक साथ लाते हैं)।
  • ये planning करने और organize करने में अधिक समय देते हैं।
  • इनका काम organization के लिए दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करना हैं ,जो आम तौर पर 5 से 20 वर्षों के लिए बनाई जाती हैं।
  • टॉप लेवल मैनेजमेंट के पास maximum authority और जिम्मेदारी होती है। ये संस्था में टॉप और final authority होते हैं। ये सीधे shareholders, government और आम जनता के लिए responsible हैं। 
  • टॉप लेवल को अधिक conceptual skills और कम technical Skills की आवश्यकता होती है।
  • संगठन की सफलता या विफलता काफी हद तक इनकी दक्षता और निर्णय लेने पर निर्भर करती है।

Middle Level Management:

मिडिल लेवल मैनेजमेंट टॉप लेवल मैनेजमेंट के द्वारा चुना जाता है। मिडिल लेवल मैनेजमेंट में Branch Manager,  Departmental Head (HOD), और Junior Executive आते हैं। Branch Head एक ब्रांच या लोकल unit के प्रमुख होते हैं  Finance Manager, Marketing Manager , Production Manager आदि Departmental Head होते हैं। Assistant Finance Manager, Assistant Marketing Manager आदि जूनियर executive कहलाते हैं। 

मिडिल लेवल मैनेजमेंट की मुख्य भूमिका निम्नानुसार संक्षेपित है: -

  • इनका काम है, उन policy और plannings को क्रियान्वित करना जो टॉप लेवल मैनेजमेंट के द्वारा बनाई जाती हैं।
  • इनके पास बहुत ही limited authority होती है। इनको अधिक टेक्निकल और मैनेजमेंट skills की जरूरत पड़ती है।  
  • मिडिल लेवल मैनेजमेंट टॉप लेवल मैनेजमेंट को नयी योजनायें बनाने की advice देने का कार्य करता है।
  • यह सभी departments के बीच में coordinate करने का काम भी करता है। इसलिए इनका ज्यादातर time सभी departments के बीच में communicate करने में बिताता है।
  • ये टॉप लेवल मैनेजमेंट और लोअर लेवल मैनेजमेंट के बीच communicate करने का job करते हैं ।और इनके बीच ये एक bridge की तरह होते हैं। जो इनके बीच ताल मेल बैठता है।
  • ये अपने departments के लिए short- term planning तैयार करते हैं जो आम तौर पर 1 से 5 वर्षों के लिए बनाई जाती हैं।


Lower Level Management:

यह मैनेजमेंट का first line मैनेजमेंट होता है। लोअर लेवल मैनेजमेंट में Foremen और Supervisors आते हैं। जिनका चयन मिडिल लेवल मैनेजमेंट के द्वारा किया जाता है।

लोवर लेवल मैनेजमेंट  की मुख्य भूमिकाये निम्नलिखित है: -


  • लोवर लेवल मैनेजमेंट का काम workers और employees को निर्देशित करना है।
  • ये workers और मिडिल लेवल मैनेजमेंट के बीच की कड़ी होते हैं जो इन दोनों के बीच में coordinate करते हैं ।
  • इनका अधिकतर समय direction और controlling में बीतता है।
  • लोवर लेवल मैनेजमेंट daily, weekly और  monthly plans बनाते हैं ।
  • इनके पास लिमिटेड ऑथोरिटी होती है पर workers से काम करवाने की महत्वपूर्ण responsibility इनके पास होती है। 
  • मैनेजमेंट के द्वारा लिए गए decisions की सूचना workers तक पहुचाना और इन decisions को क्रियान्वित करवाना इनका काम होता है। साथ ही में workers की demand और problems को मैनेजमेंट तक पहुचाने का कार्य भी लोअर लेवल मैनेजमेंट ही करता है।  
  • ये मिडिल लेवल मैनेजमेंट को regularly report करते हैं।
  • इनको अनुभव के साथ बेसिक मैनेजमेंट और अधिक तकनीकी ज्ञान और skills की जरूरत होती है।

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अंत में एक निवेदन: 

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